श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 10 (विभूति योग (Vibhuti Yoga))

अध्याय 10 · श्लोक 16

विभूति योग (Vibhuti Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 42 3 मिनट का पठन 109 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
वक्तुमर्हस्यशेषेण दिव्या ह्यात्मविभूतयः | याभिर्विभूतिभिर्लोकानिमांस्त्वं व्याप्य तिष्ठसि || १६||

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

13 पद
वक्तुम्
कहने के लिए
अर्हसि
आप योग्य हैं
अशेषेण
सम्पूर्ण रूप से
दिव्या
दिव्य
हि
ही
आत्म-विभूतय
अपनी विभूतियाँ
याभि
जिनसे
विभूतिभि
विभूतियों से
लोकान्
लोकों को
इमान्
इन
त्वम्
आप
व्याप्य
व्याप्त करके
तिष्ठसि
स्थित हैं।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

आप सम्पूर्ण रूप से अपनी उन दिव्य विभूतियों को कहने की कृपा करें, जिन विभूतियों से आप इन सब लोकों को व्याप्त करके स्थित हैं।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

Arjuna humbly requests Krishna to elaborate on His divine manifestations. Since only Krishna truly knows Himself, Arjuna asks Him to reveal these glories. This request sets the stage for the接下来的 enumeration of Krishna's divine opulences.

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

अर्जुन विनम्र निवेदन करते हैं: "आप सम्पूर्ण रूप से अपनी उन दिव्य विभूतियों को कहने की कृपा करें, जिन विभूतियों से आप इन सब लोकों को व्याप्त करके स्थित हैं।"

Arjuna, having recognized Krishna's supreme position, humbly requests a detailed description of His divine manifestations. He understands that only the Lord Himself can fully reveal His own glories.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 10: विभूति योग (Vibhuti Yoga)
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सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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