श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 10 (विभूति योग (Vibhuti Yoga))

अध्याय 10 · श्लोक 20

विभूति योग (Vibhuti Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 42 3 मिनट का पठन 110 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
अहमात्मा गुडाकेश सर्वभूताशयस्थितः | अहमादिश्च मध्यं च भूतानामन्त एव च || २०||

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

13 पद
अहम्
मैं
आत्मा
आत्मा
गुडाकेश
हे गुडाकेश (अर्जुन)
सर्व-भूत-आशय-स्थित
सब प्राणियों के हृदय में स्थित
अहम्
मैं
आदि
आदि
च
और
मध्यम्
मध्य
च
और
भूतानाम्
प्राणियों का
अन्त
अन्त
एव
ही
च
भी।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

हे गुडाकेश! मैं सब प्राणियों के हृदय में स्थित आत्मा हूँ, और मैं ही सब प्राणियों का आदि, मध्य और अन्त भी हूँ।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

Krishna begins His enumeration by stating the most fundamental truth: He is the inner Self (Atman) dwelling in the hearts of all beings. He is also the beginning, middle, and end of all existence — the source, sustainer, and destroyer of everything.

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

भगवान कृष्ण कहते हैं: "हे गुडाकेश! मैं सब प्राणियों के हृदय में स्थित आत्मा हूँ, और मैं ही सब प्राणियों का आदि, मध्य और अन्त भी हूँ।"

This foundational verse establishes Krishna's immanence as the inner Self of all beings and His transcendence as the source, sustainer, and dissolution of all creation. He is both the innermost essence and the outermost reality.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 10: विभूति योग (Vibhuti Yoga)
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सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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