श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 10 (विभूति योग (Vibhuti Yoga))

अध्याय 10 · श्लोक 21

विभूति योग (Vibhuti Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 42 3 मिनट का पठन 99 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
आदित्यानामहं विष्णुर्ज्योतिषां रविरंशुमान् | मरीचिर्मरुतामस्मि नक्षत्राणामहं शशी || २१||

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

12 पद
आदित्यानाम्
आदित्यों में
अहम्
मैं
विष्णु
विष्णु
ज्योतिषाम्
ज्योतियों में
रवि
सूर्य
अंशुमान्
तेजस्वी
मरीचि
मरीचि
मरुताम्
मरुतों में
अस्मि
हूँ
नक्षत्राणाम्
नक्षत्रों में
अहम्
मैं
शशी
चन्द्रमा।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

आदित्यों में मैं विष्णु हूँ, ज्योतियों में तेजस्वी सूर्य हूँ, मरुतों में मैं मरीचि हूँ, और नक्षत्रों में मैं चन्द्रमा हूँ।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

Krishna begins listing specific manifestations. Among the twelve Adityas (solar deities), He is Vishnu; among all luminous objects, He is the sun; among the Maruts (wind deities), He is Marichi; among the stars, He is the moon. Each is the most prominent in its category.

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

भगवान कृष्ण कहते हैं: "आदित्यों में मैं विष्णु हूँ, ज्योतियों में तेजस्वी सूर्य हूँ, मरुतों में मैं मरीचि हूँ, और नक्षत्रों में मैं चन्द्रमा हूँ।"

The Lord identifies Himself with the most prominent and powerful manifestations in various categories. This helps devotees contemplate Him through these exalted forms.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 10: विभूति योग (Vibhuti Yoga)
वर्तमान में आप श्लोक संख्या 21 का अध्ययन कर रहे हैं।
श्लोक 21/42 50% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
श्लोक कॉपी कर लिया गया है!