श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 10 (विभूति योग (Vibhuti Yoga))

अध्याय 10 · श्लोक 22

विभूति योग (Vibhuti Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 42 3 मिनट का पठन 96 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
वेदानां सामवेदोऽस्मि देवानामस्मि वासवः | इन्द्रियाणां मनश्चास्मि भूतानामस्मि चेतना || २२||

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

13 पद
वेदानाम्
वेदों में
साम-वेद
सामवेद
अस्मि
हूँ
देवानाम्
देवताओं में
अस्मि
हूँ
वासव
इन्द्र
इन्द्रियाणाम्
इन्द्रियों में
मन
मन
च
और
अस्मि
हूँ
भूतानाम्
प्राणियों में
अस्मि
हूँ
चेतना
चेतना।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

वेदों में मैं सामवेद हूँ, देवताओं में मैं इन्द्र हूँ, इन्द्रियों में मैं मन हूँ, और प्राणियों में मैं चेतना हूँ।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

Krishna continues His enumeration: among the four Vedas, He is the Sama-Veda (known for its melodious chants); among the gods, He is Indra (their king); among the senses, He is the mind (their controller); and among living beings, He is consciousness (the principle of life and awareness).

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

भगवान कृष्ण कहते हैं: "वेदों में मैं सामवेद हूँ, देवताओं में मैं इन्द्र हूँ, इन्द्रियों में मैं मन हूँ, और प्राणियों में मैं चेतना हूँ।"

The Lord identifies with the essence of each category — the most sacred scripture, the chief of gods, the controller of senses, and the very principle of life itself.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 10: विभूति योग (Vibhuti Yoga)
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सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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