श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 10 (विभूति योग (Vibhuti Yoga))

अध्याय 10 · श्लोक 23

विभूति योग (Vibhuti Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 42 3 मिनट का पठन 98 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
रुद्राणां शङ्करश्चास्मि वित्तेशो यक्षरक्षसाम् | वसूनां पावकश्चास्मि मेरुः शिखरिणामहम् || २३||

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

13 पद
रुद्राणाम्
रुद्रों में
शङ्कर
शंकर
च
और
अस्मि
हूँ
वित्तेश
कुबेर
यक्ष-रक्षसाम्
यक्ष और राक्षसों में
वसूनाम्
वसुओं में
पावक
अग्नि
च
और
अस्मि
हूँ
मेरु
मेरु
शिखरिणाम्
पर्वतों में
अहम्
मैं।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

रुद्रों में मैं शंकर हूँ, यक्ष और राक्षसों में मैं कुबेर (वित्तेश) हूँ, वसुओं में मैं पावक (अग्नि) हूँ, और पर्वतों में मैं मेरु हूँ।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

Krishna continues: among the eleven Rudras, He is Shankara (Shiva); among the supernatural beings (Yakshas and Rakshasas), He is Kubera (the treasurer of the gods); among the eight Vasus, He is Agni (fire); and among mountains, He is Mount Meru (the cosmic mountain).

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

भगवान कृष्ण कहते हैं: "रुद्रों में मैं शंकर हूँ, यक्ष और राक्षसों में मैं कुबेर हूँ, वसुओं में मैं पावक (अग्नि) हूँ, और पर्वतों में मैं मेरु हूँ।"

The Lord identifies Himself with the presiding deities of various cosmic functions and the most majestic mountain, showing His presence in all levels of creation.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 10: विभूति योग (Vibhuti Yoga)
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सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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