श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 10 (विभूति योग (Vibhuti Yoga))

अध्याय 10 · श्लोक 24

विभूति योग (Vibhuti Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 42 3 मिनट का पठन 100 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
पुरोधसां च मुख्यं मां विद्धि पार्थ बृहस्पतिम् | सेनानीनामहं स्कन्दः सरसामस्मि सागरः || २४||

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

13 पद
पुरोधसाम्
पुरोहितों में
च
और
मुख्यम्
मुख्य
माम्
मुझे
विद्धि
जानो
पार्थ
हे पार्थ
बृहस्पतिम्
बृहस्पति
सेनानीनाम्
सेनापतियों में
अहम्
मैं
स्कन्द
कार्तिकेय
सरसाम्
जलाशयों में
अस्मि
हूँ
सागर
सागर।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

हे पार्थ! पुरोहितों में मुझे मुख्य पुरोहित बृहस्पति जानो; सेनापतियों में मैं स्कन्द (कार्तिकेय) हूँ, और जलाशयों में मैं सागर हूँ।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

Krishna reveals His manifestations in positions of leadership and vastness: among priests (royal advisors), He is Brihaspati (guru of the gods); among military commanders, He is Skanda (Kartikeya); among bodies of water, He is the ocean — the greatest and most expansive.

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

भगवान कृष्ण कहते हैं: "हे पार्थ! पुरोहितों में मुझे मुख्य पुरोहित बृहस्पति जानो; सेनापतियों में मैं स्कन्द हूँ, और जलाशयों में मैं सागर हूँ।"

The Lord identifies with the foremost in each category — the wisest counselor, the mightiest general, and the vastest body of water.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 10: विभूति योग (Vibhuti Yoga)
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सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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