मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
अश्वत्थः सर्ववृक्षाणां देवर्षीणां च नारदः | गन्धर्वाणां चित्ररथः सिद्धानां कपिलो मुनिः || २६||
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
10 पदअश्वत्थ
पीपल का वृक्ष
सर्व-वृक्षाणाम्
सब वृक्षों में
देवर्षीणाम्
देवर्षियों में
च
और
नारद
नारद
गन्धर्वाणाम्
गन्धर्वों में
चित्ररथ
चित्ररथ
सिद्धानाम्
सिद्धों में
कपिल
कपिल
मुनि
मुनि।
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
सब वृक्षों में मैं अश्वत्थ (पीपल) हूँ, देवर्षियों में मैं नारद हूँ, गन्धर्वों में मैं चित्ररथ हूँ, और सिद्धों में मैं कपिल मुनि हूँ।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
Krishna identifies with the most revered in each category: the sacred peepul tree (associated with wisdom and longevity); Narada (the celestial sage who moves freely across worlds); Chitraratha (king of the celestial musicians); and Kapila (the great sage who expounded the Samkhya philosophy).
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
भगवान कृष्ण कहते हैं: "सब वृक्षों में मैं अश्वत्थ हूँ, देवर्षियों में मैं नारद हूँ, गन्धर्वों में मैं चित्ररथ हूँ, और सिद्धों में मैं कपिल मुनि हूँ।"
The Lord identifies with beings and objects that represent different aspects of spiritual and celestial excellence — the tree of knowledge, the messenger between worlds, the master of celestial arts, and the founder of a philosophical system.