मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
उच्चैःश्रवसमश्वानां विद्धि माममृतोद्भवम् | ऐरावतं गजेन्द्राणां नराणां च नराधिपम् || २७||
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
10 पदउच्चैःश्रवसम्
उच्चैःश्रवा
अश्वानाम्
घोड़ों में
विद्धि
जानो
माम्
मुझे
अमृत-उद्भवम्
अमृत से उत्पन्न
ऐरावतम्
ऐरावत
गज-इन्द्राणाम्
श्रेष्ठ हाथियों में
नराणाम्
मनुष्यों में
च
और
नर-अधिपम्
राजा।
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
घोड़ों में मुझे अमृत से उत्पन्न उच्चैःश्रवा जानो, श्रेष्ठ हाथियों में ऐरावत, और मनुष्यों में राजा जानो।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
Krishna identifies with the finest and most exalted in each category: Ucchaisravas (the seven-headed celestial horse that emerged during the churning of the ocean); Airavata (the divine white elephant of Indra); and among humans, the king (the ruler and protector of society).
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
भगवान कृष्ण कहते हैं: "घोड़ों में मुझे अमृत से उत्पन्न उच्चैःश्रवा जानो, श्रेष्ठ हाथियों में ऐरावत, और मनुष्यों में राजा जानो।"
The Lord identifies with the noblest and most powerful representatives — the celestial horse born of nectar, the divine elephant, and the human ruler who maintains order and justice.