श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 10 (विभूति योग (Vibhuti Yoga))

अध्याय 10 · श्लोक 28

विभूति योग (Vibhuti Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 42 3 मिनट का पठन 102 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
आयुधानामहं वज्रं धेनूनामस्मि कामधुक् | प्रजनश्चास्मि कन्दर्पः सर्पाणामस्मि वासुकिः || २८||

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

13 पद
आयुधानाम्
शस्त्रों में
अहम्
मैं
वज्रम्
वज्र
धेनूनाम्
गौओं में
अस्मि
हूँ
कामधुक्
कामधेनु
प्रजन
जननेन्द्रिय
च
और
अस्मि
हूँ
कन्दर्प
कामदेव
सर्पाणाम्
सर्पों में
अस्मि
हूँ
वासुकि
वासुकि।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

शस्त्रों में मैं वज्र हूँ, गौओं में मैं कामधेनु हूँ, प्रजनन हेतुओं में मैं कन्दर्प (कामदेव) हूँ, और सर्पों में मैं वासुकि हूँ।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

Krishna continues: among weapons, He is the thunderbolt (Indra's invincible weapon); among cows, He is Kamadhenu (the celestial cow that grants all desires); among procreative causes, He is Kandarpa (Cupid, the god of love); among serpents, He is Vasuki (the king of serpents used in the churning of the ocean).

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

भगवान कृष्ण कहते हैं: "शस्त्रों में मैं वज्र हूँ, गौओं में मैं कामधेनु हूँ, प्रजनन हेतुओं में मैं कन्दर्प हूँ, और सर्पों में मैं वासुकि हूँ।"

The Lord identifies with the most powerful and significant in each domain — the invincible weapon, the all-providing cow, the force of creation, and the king of serpents.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 10: विभूति योग (Vibhuti Yoga)
वर्तमान में आप श्लोक संख्या 28 का अध्ययन कर रहे हैं।
श्लोक 28/42 67% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
श्लोक कॉपी कर लिया गया है!