मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
आयुधानामहं वज्रं धेनूनामस्मि कामधुक् | प्रजनश्चास्मि कन्दर्पः सर्पाणामस्मि वासुकिः || २८||
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
13 पदआयुधानाम्
शस्त्रों में
अहम्
मैं
वज्रम्
वज्र
धेनूनाम्
गौओं में
अस्मि
हूँ
कामधुक्
कामधेनु
प्रजन
जननेन्द्रिय
च
और
अस्मि
हूँ
कन्दर्प
कामदेव
सर्पाणाम्
सर्पों में
अस्मि
हूँ
वासुकि
वासुकि।
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
शस्त्रों में मैं वज्र हूँ, गौओं में मैं कामधेनु हूँ, प्रजनन हेतुओं में मैं कन्दर्प (कामदेव) हूँ, और सर्पों में मैं वासुकि हूँ।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
Krishna continues: among weapons, He is the thunderbolt (Indra's invincible weapon); among cows, He is Kamadhenu (the celestial cow that grants all desires); among procreative causes, He is Kandarpa (Cupid, the god of love); among serpents, He is Vasuki (the king of serpents used in the churning of the ocean).
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
भगवान कृष्ण कहते हैं: "शस्त्रों में मैं वज्र हूँ, गौओं में मैं कामधेनु हूँ, प्रजनन हेतुओं में मैं कन्दर्प हूँ, और सर्पों में मैं वासुकि हूँ।"
The Lord identifies with the most powerful and significant in each domain — the invincible weapon, the all-providing cow, the force of creation, and the king of serpents.