मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
प्रह्लादश्चास्मि दैत्यानां कालः कलयतामहम् | मृगाणां च मृगेन्द्रोऽहं वैनतेयश्च पक्षिणाम् || ३०||
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
14 पदप्रह्लाद
प्रह्लाद
च
और
अस्मि
हूँ
दैत्यानाम्
दैत्यों में
काल
काल
कलयताम्
गणना करने वालों में
अहम्
मैं
मृगाणाम्
पशुओं में
च
और
मृगेन्द्र
सिंह
अहम्
मैं
वैनतेय
गरुड़
च
और
पक्षिणाम्
पक्षियों में।
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
दैत्यों में मैं प्रह्लाद हूँ, गणना करने वालों में मैं काल हूँ, पशुओं में मैं सिंह हूँ, और पक्षियों में मैं वैनतेय (गरुड़) हूँ।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
Krishna identifies with the best and most powerful in diverse categories: among demons, He is Prahlada (a great devotee of Vishnu despite being born in a demon family); among those who calculate or measure, He is time (which reckons all); among animals, He is the lion (king of beasts); among birds, He is Garuda (the divine eagle, mount of Vishnu).
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
भगवान कृष्ण कहते हैं: "दैत्यों में मैं प्रह्लाद हूँ, गणना करने वालों में मैं काल हूँ, पशुओं में मैं सिंह हूँ, और पक्षियों में मैं वैनतेय (गरुड़) हूँ।"
The Lord shows His presence in all realms — even among demons, He manifests as the devotee Prahlada; as time, He is the ultimate measurer; as lion and Garuda, He is the king of beasts and birds.