मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
पवनः पवतामस्मि रामः शस्त्रभृतामहम् | झषाणां मकरश्चास्मि स्रोतसामस्मि जाह्नवी || ३१||
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
13 पदपवन
पवन
पवताम्
पवित्र करने वालों में
अस्मि
हूँ
राम
राम
शस्त्र-भृताम्
शस्त्रधारियों में
अहम्
मैं
झषाणाम्
मछलियों में
मकर
मगर
च
और
अस्मि
हूँ
स्रोतसाम्
बहने वाली नदियों में
अस्मि
हूँ
जाह्नवी
गंगा।
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
पवित्र करने वालों में मैं पवन हूँ, शस्त्रधारियों में मैं राम हूँ, मछलियों में मैं मगर हूँ, और बहने वाली नदियों में मैं गंगा हूँ।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
Krishna continues: among purifiers, He is the wind (which cleanses all); among warriors, He is Rama (the ideal hero and avatar); among fish, He is the shark (the most powerful); among rivers, He is the Ganges (the holiest and most sacred).
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
भगवान कृष्ण कहते हैं: "पवित्र करने वालों में मैं पवन हूँ, शस्त्रधारियों में मैं राम हूँ, मछलियों में मैं मगर हूँ, और बहने वाली नदियों में मैं गंगा हूँ।"
The Lord identifies with the most powerful and sacred in each category — the purifying wind, the perfect warrior-avatar, the mightiest aquatic creature, and the holiest river.