श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 10 (विभूति योग (Vibhuti Yoga))

अध्याय 10 · श्लोक 32

विभूति योग (Vibhuti Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 42 3 मिनट का पठन 95 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
सर्गाणामादिरन्तश्च मध्यं चैवाहमर्जुन | अध्यात्मविद्या विद्यानां वादः प्रवदतामहम् || ३२||

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

14 पद
सर्गाणाम्
सृष्टियों में
आदि
आदि
अन्त
अन्त
च
और
मध्यम्
मध्य
च
और
एव
ही
अहम्
मैं
अर्जुन
हे अर्जुन
अध्यात्म-विद्या
आध्यात्मिक विद्या
विद्यानाम्
विद्याओं में
वाद
तर्क
प्रवदताम्
वाद-विवाद करने वालों में
अहम्
मैं।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

हे अर्जुन! सृष्टियों में मैं आदि, अन्त और मध्य हूँ; विद्याओं में मैं अध्यात्मविद्या हूँ, और वाद-विवाद करने वालों में मैं निर्णायक सत्य हूँ।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

Krishna reveals His all-pervasiveness: He is the beginning, middle, and end of all creations. Among all branches of knowledge, He is the science of the Self (Adhyatma Vidya) — the highest knowledge. Among logicians and debaters, He is the conclusive truth that resolves all arguments.

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

भगवान कृष्ण कहते हैं: "हे अर्जुन! सृष्टियों में मैं आदि, अन्त और मध्य हूँ; विद्याओं में मैं अध्यात्मविद्या हूँ, और वाद-विवाद करने वालों में मैं निर्णायक सत्य हूँ।"

The Lord reveals His comprehensive presence — He is the source, sustainer, and dissolution of all creation; He is the highest knowledge of the Self; and He is the ultimate truth that resolves all philosophical debates.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 10: विभूति योग (Vibhuti Yoga)
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श्लोक 32/42 76% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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