श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 10 (विभूति योग (Vibhuti Yoga))

अध्याय 10 · श्लोक 33

विभूति योग (Vibhuti Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 42 3 मिनट का पठन 103 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
अक्षराणामकारोऽस्मि द्वन्द्वः सामासिकस्य च | अहमेवाक्षयः कालो धाताहं विश्वतोमुखः || ३३||

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

13 पद
अक्षराणाम्
अक्षरों में
अकार
अकार
अस्मि
हूँ
द्वन्द्व
द्वन्द्व समास
सामासिकस्य
समासों में
च
और
अहम्
मैं
एव
ही
अक्षय
अविनाशी
काल
काल
धाता
विधाता (ब्रह्मा)
अहम्
मैं
विश्वतो-मुख
सब ओर मुख वाला।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

अक्षरों में मैं अकार हूँ, समासों में मैं द्वन्द्व समास हूँ, मैं ही अविनाशी काल हूँ, और मैं ही सब ओर मुख वाला विधाता (ब्रह्मा) हूँ।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

Krishna continues: among letters of the alphabet, He is "A" (the first and foundational sound from which all speech emerges); among compound words, He is the dual compound (representing pairs); He is inexhaustible time (eternal and infinite); and He is Brahma (the creator) facing all directions, indicating His omnipresence.

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

भगवान कृष्ण कहते हैं: "अक्षरों में मैं अकार हूँ, समासों में मैं द्वन्द्व समास हूँ, मैं ही अविनाशी काल हूँ, और मैं ही सब ओर मुख वाला विधाता हूँ।"

The Lord reveals His presence in the fundamentals of language, time, and creation. As the letter "A", He is the source of all sound; as time, He is eternal; as Brahma, He is the creator with universal vision.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 10: विभूति योग (Vibhuti Yoga)
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सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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