श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 10 (विभूति योग (Vibhuti Yoga))

अध्याय 10 · श्लोक 36

विभूति योग (Vibhuti Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 42 3 मिनट का पठन 99 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
द्यूतं छलयतामस्मि तेजस्तेजस्विनामहम् | जयोऽस्मि व्यवसायोऽस्मि सत्त्वं सत्त्ववतामहम् || ३६||

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

13 पद
द्यूतम्
जुआ
छलयताम्
धोखा देने वालों में
अस्मि
हूँ
तेज
तेज
तेजस्विनाम्
तेजस्वियों में
अहम्
मैं
जय
विजय
अस्मि
हूँ
व्यवसाय
उद्योग
अस्मि
हूँ
सत्त्व
सत्त्वगुण
सत्त्ववताम्
सत्त्वगुण सम्पन्नों में
अहम्
मैं।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

धोखा देने वालों में मैं जुआ हूँ, तेजस्वियों में मैं तेज हूँ, मैं विजय हूँ, मैं उद्योग हूँ, और सत्त्वगुण सम्पन्नों में मैं सत्त्व हूँ।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

Krishna reveals His presence in both negative and positive contexts: among deceitful activities, He is gambling (representing risk and uncertainty); among the splendid, He is the very splendor; He is victory itself; He is determination in the resolute; and among the virtuous, He is the quality of goodness (sattva).

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

भगवान कृष्ण कहते हैं: "धोखा देने वालों में मैं जुआ हूँ, तेजस्वियों में मैं तेज हूँ, मैं विजय हूँ, मैं उद्योग हूँ, और सत्त्वगुण सम्पन्नों में मैं सत्त्व हूँ।"

The Lord reveals that He is present in all aspects of existence — even in activities that involve risk and deception, He is the underlying principle. He is the essence of all positive qualities: splendor, victory, determination, and purity.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 10: विभूति योग (Vibhuti Yoga)
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सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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