श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 10 (विभूति योग (Vibhuti Yoga))

अध्याय 10 · श्लोक 37

विभूति योग (Vibhuti Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 42 3 मिनट का पठन 109 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
वृष्णीनां वासुदेवोऽस्मि पाण्डवानां धनंजयः | मुनीनामप्यहं व्यासः कवीनामुशना कविः || ३७||

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

12 पद
वृष्णीनाम्
वृष्णि वंशियों में
वासुदेव
वासुदेव (कृष्ण)
अस्मि
हूँ
पाण्डवानाम्
पाण्डवों में
धनंजय
धनंजय (अर्जुन)
मुनीनाम्
मुनियों में
अपि
भी
अहम्
मैं
व्यास
व्यास
कवीनाम्
कवियों में
उशना
उशना (शुक्राचार्य)
कवि
कवि।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

वृष्णिवंशियों में मैं वासुदेव हूँ, पाण्डवों में मैं धनंजय (अर्जुन) हूँ, मुनियों में मैं व्यास हूँ, और कवियों में मैं उशना (शुक्राचार्य) कवि हूँ।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

In a touching revelation, Krishna identifies with His own incarnation (Vasudeva) and with His devotee Arjuna (Dhananjaya). He also identifies with the great sage Vyasa (compiler of the Vedas and author of the Mahabharata) and with Shukracharya (the sage and poet).

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

भगवान कृष्ण कहते हैं: "वृष्णिवंशियों में मैं वासुदेव हूँ, पाण्डवों में मैं धनंजय (अर्जुन) हूँ, मुनियों में मैं व्यास हूँ, और कवियों में मैं उशना कवि हूँ।"

The Lord identifies with His own manifestation in the Vrishni dynasty, with His beloved devotee Arjuna, with the sage who compiled sacred knowledge, and with the poet who composed profound verses.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 10: विभूति योग (Vibhuti Yoga)
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सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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