मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
बुद्धिर्ज्ञानमसम्मोहः क्षमा सत्यं दमः शमः | सुखं दुःखं भवोऽभावो भयं चाभयमेव च || ४||
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
16 पदबुद्धि
बुद्धि
ज्ञानम्
ज्ञान
असम्मोहः
मोह का अभाव
क्षमा
क्षमा
सत्यम्
सत्य
दमः
दमन (इंद्रिय दमन)
शमः
शम (मन का निग्रह)
सुखम्
सुख
दुःखम्
दुःख
भवः
उत्पत्ति
अभाव
अभाव (विनाश)
भयम्
भय
च
और
अभयम्
अभय
एव
ही
च
तथा।
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
बुद्धि, ज्ञान, असम्मोह (मोह का अभाव), क्षमा, सत्य, इंद्रिय दमन, मनःशमन, सुख, दुःख, उत्पत्ति, विनाश, भय और अभय —
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
Krishna begins enumerating the various qualities and states that emanate from Him. All these diverse attributes—both positive and negative—have their source in the Divine. This shows that everything, whether considered good or bad, is a manifestation of the Lord’s energy.
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
भगवान श्रीकृष्ण अब अपनी विभूतियों का वर्णन आरम्भ करते हैं। वे कहते हैं कि बुद्धि, ज्ञान, क्षमा, सत्य, इंद्रिय दमन, मनःशमन, सुख-दुःख, जन्म-मृत्यु, भय-अभय आदि सभी उन्हीं से प्रकट होते हैं। इसका तात्पर्य है कि समस्त चेतन और अचेतन गुणों का स्रोत एकमात्र परमात्मा हैं।
The Lord lists various qualities and states of existence, indicating that all of them originate from Him. This establishes that everything we experience is a manifestation of the divine energy.