श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 10 (विभूति योग (Vibhuti Yoga))

अध्याय 10 · श्लोक 6

विभूति योग (Vibhuti Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 42 4 मिनट का पठन 121 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
महर्षयः सप्त पूर्वे चत्वारो मनवस्तथा | मद्भावा मानसा जाता येषां लोक इमाः प्रजाः || ६||

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

13 पद
महर्षयः
महर्षि
सप्त
सात
पूर्वे
पूर्व में
चत्वारः
चार
मनवः
मनु
तथा
भी
मद्भावा
मेरे भाव से युक्त
मानसा
मन से
जाता
उत्पन्न हुए
येषाम्
जिनसे
लोके
लोक में
इमाः
ये
प्रजाः
प्रजा।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

सात महर्षि, उनसे भी पूर्व के चार सनकादि ऋषि तथा चौदह मनु — ये सब मेरे भाव से युक्त मेरे मन से उत्पन्न हुए हैं, जिनसे संसार में यह सम्पूर्ण प्रजा उत्पन्न हुई है।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

Krishna identifies the original progenitors of humanity and spiritual knowledge as His mental creations. The seven great sages (Saptarishis), the four Kumaras (Sanaka, Sanandana, Sanatana, Sanatkumara), and the fourteen Manus are all empowered by Him to carry out creation and maintain spiritual lineage.

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि सात महर्षि (मरीचि, अत्रि, अंगिरा, पुलस्त्य, पुलह, क्रतु और वशिष्ठ), उनसे भी पूर्व के चार सनकादि ऋषि, तथा चौदह मनु — ये सब मेरे भाव से युक्त होकर मेरे मन से उत्पन्न हुए हैं। इन्हीं से संसार की समस्त प्रजा उत्पन्न हुई है।

The Lord reveals that the original sages and progenitors of mankind were created directly from His mind. They are empowered by Him to carry out the work of creation and to maintain spiritual knowledge in the universe.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 10: विभूति योग (Vibhuti Yoga)
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सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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