मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
अर्जुन उवाच । मदनुग्रहाय परमं गुह्यमध्यात्मसंज्ञितम् । यत्त्वयोक्तं वचस्तेन मोहोऽयं विगतो मम ॥ १॥
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
16 पदअर्जुन
अर्जुन
उवाच
बोले
मत्
मुझ पर
अनुग्रहाय
कृपा करने के लिए
परमम्
परम
गुह्यम्
गोपनीय
अध्यात्मसंज्ञितम्
अध्यात्म कहा गया
यत्
जो
त्वया
आपके द्वारा
उक्तम्
कहा गया
वच
वचन
तेन
उससे
मोह
मोह
अयम्
यह
विगत
दूर हो गया
मम
मेरा।
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
अर्जुन बोले: आपने मुझ पर कृपा करके जो परम गोपनीय अध्यात्म-विषयक वचन कहे हैं, उनसे मेरा यह मोह दूर हो गया है।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
अर्जुन भगवान् कृष्ण के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हैं कि उनके उपदेशों से उनका अज्ञान दूर हुआ। यह श्लोक पूर्व अध्यायों के ज्ञान की सार्थकता को दर्शाता है।
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
इस श्लोक में अर्जुन भगवान् श्रीकृष्ण से कहते हैं कि आपने मुझ पर कृपा करके जो परम गोपनीय अध्यात्म का ज्ञान दिया, उससे मेरा मोह दूर हो गया।
आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message
गुरु की कृपा से शिष्य का अज्ञान नष्ट होता है। अर्जुन का यह कथन दर्शाता है कि सच्चे ज्ञान से मोह का नाश होता है।