श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 12 (भक्ति योग (Bhakti Yoga))

अध्याय 12 · श्लोक 10

भक्ति योग (Bhakti Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 20 2 मिनट का पठन 108 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
अभ्यासेऽप्यसमर्थोऽसि मत्कर्मपरमो भव । मदर्थमपि कर्माणि कुर्वन्सिद्धिमवाप्स्यसि ॥ १०॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

12 पद
अभ्यासे
in practice
अपि
even
असमर्थ
unable
असि
you are
मत्-कर्म-परम
intent on working for Me
भव
become
मत्-अर्थम्
for My sake
अपि
even
कर्माणि
actions
कुर्वन्
doing
सिद्धिम्
perfection
अवाप्स्यसि
you will attain.

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

यदि तुम अभ्यास करने में भी असमर्थ हो, तो मेरे लिए कर्म करने में तत्पर हो जाओ। मेरे लिए कर्म करते हुए भी तुम सिद्धि को प्राप्त करोगे।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

यदि अभ्यास भी न कर सको तो मेरे लिए कर्म करो। फल की इच्छा छोड़कर मुझे समर्पित भाव से कर्म करना भी सिद्धि देगा।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

यदि तुम अभ्यास में भी असमर्थ हो, तो मेरे लिए कर्म करने में तत्पर हो जाओ। मेरे लिए कर्म करते हुए भी तुम सिद्धि को प्राप्त कर लोगे।

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

ईश्वर के लिए किए गए कर्म भी उतने ही पवित्र हैं। फलासक्ति त्यागकर ईश्वरार्पण भाव से कर्म करना भी भक्ति का ही एक रूप है।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 12: भक्ति योग (Bhakti Yoga)
वर्तमान में आप श्लोक संख्या 10 का अध्ययन कर रहे हैं।
श्लोक 10/20 50% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
श्लोक कॉपी कर लिया गया है!