श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 12 (भक्ति योग (Bhakti Yoga))

अध्याय 12 · श्लोक 9

भक्ति योग (Bhakti Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 20 2 मिनट का पठन 121 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
अथ चित्तं समाधातुं न शक्नोषि मयि स्थिरम् । अभ्यासयोगेन ततो मामिच्छाप्तुं धनञ्जय ॥ ९॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

13 पद
अथ
if
चित्तम्
the mind
समाधातुम्
to fix
न
not
शक्नोषि
you are able
मयि
in Me
स्थिरम्
steadily
अभ्यास-योगेन
by practice of yoga
तत
then
माम्
Me
इच्छ
desire
आप्तुम्
to attain
धनञ्जय
O Dhananjaya.

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

यदि तुम मुझमें चित्त को स्थिर रूप से नहीं लगा सकते, तो हे धनंजय, अभ्यासयोग द्वारा मुझे प्राप्त करने की इच्छा करो।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

यदि कोई मन को सीधे मुझमें स्थिर नहीं कर सकता, तो उसे अभ्यासयोग (बार-बार अभ्यास) का सहारा लेना चाहिए। यह क्रमिक साधना है।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

यदि तुम मेरे में चित्त को स्थिर रूप से लगाने में समर्थ नहीं हो, तो हे धनंजय, अभ्यासयोग के द्वारा मुझे प्राप्त करने की इच्छा करो।

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

यदि तत्काल एकाग्रता संभव न हो, तो निरंतर अभ्यास द्वारा धीरे-धीरे सिद्धि प्राप्त की जा सकती है। अभ्यास से सफलता अवश्य मिलती है।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 12: भक्ति योग (Bhakti Yoga)
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श्लोक 9/20 45% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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