मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
मय्येव मन आधत्स्व मयि बुद्धिं निवेशय । निवसिष्यसि मय्येव अत ऊर्ध्वं न संशयः ॥ ८॥
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
13 पदमयि
in Me
एव
alone
मन
mind
आधत्स्व
fix
मयि
in Me
बुद्धिम्
intellect
निवेशय
place
निवसिष्यसि
you will dwell
मयि
in Me
एव
alone
अतः ऊर्ध्वम्
hereafter
न
no
संशय
doubt.
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
मुझमें ही मन को लगाओ, मुझमें ही बुद्धि को लगाओ; इसके बाद तुम मुझमें ही निवास करोगे, इसमें कोई संशय नहीं।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
भगवान अर्जुन को सीधा उपदेश देते हैं: अपने मन और बुद्धि को मुझमें स्थिर करो, फिर तुम सदा मुझमें ही रहोगे। यह सर्वोच्च साधना है।
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
भगवान अर्जुन से कहते हैं कि तुम अपने मन को मुझमें ही लगाओ, अपनी बुद्धि को मुझमें ही लगाओ; फिर तुम सदा मुझमें ही निवास करोगे। इसमें कोई संशय नहीं है।
आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message
ईश्वर में मन और बुद्धि का पूर्ण समर्पण ही मोक्ष का मार्ग है। ऐसा साधक ईश्वर में ही स्थित हो जाता है।