श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 12 (भक्ति योग (Bhakti Yoga))

अध्याय 12 · श्लोक 12

भक्ति योग (Bhakti Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 20 3 मिनट का पठन 115 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
श्रेयो हि ज्ञानमभ्यासाज्ज्ञानाद्ध्यानं विशिष्यते । ध्यानात्कर्मफलत्यागस्त्यागाच्छान्तिरनन्तरम् ॥ १२॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

12 पद
श्रेय
better
हि
indeed
ज्ञानम्
knowledge
अभ्यासात्
than practice
ज्ञानात्
than knowledge
ध्यानम्
meditation
विशिष्यते
is superior
ध्यानात्
than meditation
कर्म-फल-त्याग
renunciation of fruits of actions
त्यागात्
from renunciation
शान्ति
peace
अनन्तरम्
immediately.

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

अभ्यास से ज्ञान श्रेष्ठ है; ज्ञान से ध्यान श्रेष्ठ है; ध्यान से कर्मफल का त्याग श्रेष्ठ है; त्याग से तुरंत शांति मिलती है।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

यह श्लोक साधना के विभिन्न स्तरों की तुलना करता है। अभ्यास से ज्ञान, ज्ञान से ध्यान, ध्यान से कर्मफल त्याग श्रेष्ठ बताया गया है। परंतु यहाँ "श्रेयः" का अर्थ क्रमिक उत्कर्ष न होकर साधक की योग्यता के अनुसार उपाय है। अंततः कर्मफल त्याग से तत्काल शांति मिलती है।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

अभ्यास से ज्ञान श्रेष्ठ है, ज्ञान से ध्यान श्रेष्ठ है, और ध्यान से कर्मफल का त्याग श्रेष्ठ है। त्याग से तुरंत शांति प्राप्त होती है।

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

साधना के मार्ग पर अभ्यास, ज्ञान, ध्यान और त्याग क्रमिक सोपान हैं। परंतु सबसे सीधा और शांतिदायक मार्ग है कर्मफल का त्याग, अर्थात निष्काम कर्मयोग।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 12: भक्ति योग (Bhakti Yoga)
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सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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