श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 12 (भक्ति योग (Bhakti Yoga))

अध्याय 12 · श्लोक 20

भक्ति योग (Bhakti Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 20 3 मिनट का पठन 119 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
ये तु धर्म्यामृतमिदं यथोक्तं पर्युपासते । श्रद्दधाना मत्परमा भक्तास्तेऽतीव मे प्रियाः ॥ २०॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

13 पद
ये
who
तु
but
धर्म्य-अमृतम्
the nectar of righteousness
इदम्
this
यथा-उक्तम्
as described
पर्युपासते
follow
श्रद्दधाना
endowed with faith
मत्-परमा
having Me as the supreme
भक्ता
devotees
ते
they
अतीव
exceedingly
मे
to Me
प्रिय
dear.

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

परन्तु जो इस धर्म्य अमृत (भक्तियोग) को, जैसा ऊपर कहा गया है, श्रद्धा सहित, मुझ परम परायण होकर सेवन करते हैं, वे भक्त मुझे अत्यन्त प्रिय हैं।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

भगवान ने भक्त के लक्षण बताने के बाद कहा कि जो इस प्रकार वर्णित भक्तियोग का श्रद्धापूर्वक पालन करते हैं, वे मुझे अत्यंत प्रिय हैं। यहाँ "अतीव" शब्द विशेष बल देता है।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

परन्तु जो इस धर्ममय अमृत के समान भक्तियोग का, जैसा कहा गया है, श्रद्धापूर्वक, मुझे ही परम लक्ष्य मानकर अनुसरण करते हैं, वे भक्त मुझे अत्यन्त प्रिय हैं।

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

यह श्लोक अध्याय 12 का निष्कर्ष है। भक्तियोग का पालन श्रद्धा और एकनिष्ठता से करने वाले भक्त भगवान को अत्यधिक प्रिय होते हैं। यह भक्ति की सर्वोच्चता को स्थापित करता है।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 12: भक्ति योग (Bhakti Yoga)
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ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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