श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 12 (भक्ति योग (Bhakti Yoga))

अध्याय 12 · श्लोक 19

भक्ति योग (Bhakti Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 20 3 मिनट का पठन 114 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
तुल्यनिन्दास्तुतिर्मौनी सन्तुष्टो येन केनचित् । अनिकेतः स्थिरमतिर्भक्तिमान्मे प्रियो नरः ॥ १९॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

10 पद
तुल्य-निन्दा-स्तुति
to whom censure and praise are equal
मौनी
silent
सन्तुष्ट
content
येन केनचित्
with anything
अनिकेत
homeless
स्थिर-मति
steady-minded
भक्तिमान
full of devotion
मे
to Me
प्रिय
dear
नर
person.

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

जिसके लिए निन्दा और स्तुति समान है, मौनी है, जो किसी भी प्रकार से संतुष्ट रहता है, बिना घर का (आश्रम रहित), स्थिर बुद्धि वाला, ऐसा भक्तिमान पुरुष मुझे प्रिय है।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

तुल्यनिन्दास्तुति - निंदा और स्तुति में समान; मौनी - मौन रहने वाला (वाणी पर नियंत्रण); सन्तुष्टः येन केनचित् - जो कुछ भी मिले उसी में संतुष्ट; अनिकेतः - बिना निश्चित आवास (घर-गृहस्थी से आसक्ति रहित); स्थिरमतिः - स्थिर बुद्धि।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

जिसके लिए निंदा और स्तुति समान है, जो मौनी है, जो किसी भी वस्तु से संतुष्ट है, जिसका कोई निश्चित आश्रय नहीं है, स्थिर बुद्धि वाला है, ऐसा भक्तिमान पुरुष मुझे प्रिय है।

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

सच्चा भक्त लोक-लज्जा और आलोचना से परे होता है। वह संतोषी और स्थिरचित्त होता है। उसे किसी भौतिक आश्रय की आवश्यकता नहीं, उसका आश्रय केवल ईश्वर है।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 12: भक्ति योग (Bhakti Yoga)
वर्तमान में आप श्लोक संख्या 19 का अध्ययन कर रहे हैं।
श्लोक 19/20 95% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
श्लोक कॉपी कर लिया गया है!