मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
तुल्यनिन्दास्तुतिर्मौनी सन्तुष्टो येन केनचित् । अनिकेतः स्थिरमतिर्भक्तिमान्मे प्रियो नरः ॥ १९॥
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
10 पदतुल्य-निन्दा-स्तुति
to whom censure and praise are equal
मौनी
silent
सन्तुष्ट
content
येन केनचित्
with anything
अनिकेत
homeless
स्थिर-मति
steady-minded
भक्तिमान
full of devotion
मे
to Me
प्रिय
dear
नर
person.
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
जिसके लिए निन्दा और स्तुति समान है, मौनी है, जो किसी भी प्रकार से संतुष्ट रहता है, बिना घर का (आश्रम रहित), स्थिर बुद्धि वाला, ऐसा भक्तिमान पुरुष मुझे प्रिय है।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
तुल्यनिन्दास्तुति - निंदा और स्तुति में समान; मौनी - मौन रहने वाला (वाणी पर नियंत्रण); सन्तुष्टः येन केनचित् - जो कुछ भी मिले उसी में संतुष्ट; अनिकेतः - बिना निश्चित आवास (घर-गृहस्थी से आसक्ति रहित); स्थिरमतिः - स्थिर बुद्धि।
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
जिसके लिए निंदा और स्तुति समान है, जो मौनी है, जो किसी भी वस्तु से संतुष्ट है, जिसका कोई निश्चित आश्रय नहीं है, स्थिर बुद्धि वाला है, ऐसा भक्तिमान पुरुष मुझे प्रिय है।
आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message
सच्चा भक्त लोक-लज्जा और आलोचना से परे होता है। वह संतोषी और स्थिरचित्त होता है। उसे किसी भौतिक आश्रय की आवश्यकता नहीं, उसका आश्रय केवल ईश्वर है।