श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 13 (क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग (Kshetra Kshetragya Vibhag Yoga))

अध्याय 13 · श्लोक 12

क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग (Kshetra Kshetragya Vibhag Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 35 3 मिनट का पठन 129 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
अध्यात्मज्ञाननित्यत्वं तत्त्वज्ञानार्थदर्शनम् | एतज्ज्ञानमिति प्रोक्तमज्ञानं यदतोऽन्यथा || १२ ||

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

10 पद
अध्यात्मज्ञाननित्यत्वम्
अध्यात्म ज्ञान में नित्य स्थिति
तत्त्वज्ञानार्थदर्शनम्
तत्त्वज्ञान के उद्देश्य का दर्शन
एतत्
यह
ज्ञानम्
ज्ञान
इति
इस प्रकार
प्रोक्तम्
कहा गया
अज्ञानम्
अज्ञान
यत्
जो
अत
इससे
अन्यथा
अन्यथा

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

अध्यात्म-ज्ञान में नित्य स्थिति और तत्त्वज्ञान के उद्देश्य (परमात्मा) का साक्षात्कार – यह सब ज्ञान कहा गया है और जो इससे विपरीत है वह अज्ञान है।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

यहाँ ज्ञान की पराकाष्ठा बताई गई है – आत्मज्ञान में स्थिरता और सत्य का साक्षात्कार। This describes the culmination of knowledge – steadfastness in Self-knowledge and realization of Truth.

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

अध्यात्म-ज्ञान में नित्य स्थिति और तत्त्वज्ञान के लक्ष्य (परमात्मा) का दर्शन – यह सब ज्ञान है, और इसके विपरीत जो कुछ है वह अज्ञान है।

Constant abidance in Self-knowledge and realization of the object of true knowledge – this is declared as knowledge; what is contrary to this is ignorance.

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

सच्चा ज्ञान आत्मा में स्थित होना और परमात्मा का अनुभव करना है।

True knowledge is to be established in the Self and to experience the Supreme.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 13: क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग (Kshetra Kshetragya Vibhag Yoga)
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श्लोक 12/35 34% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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