मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
इति क्षेत्रं तथा ज्ञानं ज्ञेयं चोक्तं समासतः | मद्भक्त एतद्विज्ञाय मद्भावायोपपद्यते || १९ ||
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
13 पदइति
इस प्रकार
क्षेत्रम्
क्षेत्र
तथा
तथा
ज्ञानम्
ज्ञान
ज्ञेयम्
ज्ञेय
च
और
उक्तम्
कहा गया
समासतः
संक्षेप में
मद्भक्त
मेरा भक्त
एतत्
इस
विज्ञाय
भलीभाँति जानकर
मद्भावाय
मेरे स्वरूप को
उपपद्यते
प्राप्त हो जाता है
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
इस प्रकार क्षेत्र, ज्ञान और ज्ञेय संक्षेप में कहा गया। मेरा भक्त इसे भलीभाँति जानकर मेरे स्वरूप को प्राप्त हो जाता है।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
यह श्लोक पूर्वोक्त विवरण का सारांश है। इसे जानने वाला भक्त भगवत्स्वरूप को प्राप्त होता है। This verse summarizes the previous descriptions. The devotee who knows this attains the nature of the Lord.
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
इस प्रकार क्षेत्र, ज्ञान और ज्ञेय का संक्षेप में वर्णन किया गया। मेरा भक्त इसे जानकर मेरे स्वरूप को प्राप्त होता है।
Thus the field, knowledge, and the knowable have been briefly stated. My devotee, knowing this, attains to My nature.
आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message
सच्चा ज्ञान भक्ति के साथ मिलकर मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है।
True knowledge combined with devotion leads to liberation.