मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
उपद्रष्टाऽनुमन्ता च भर्ता भोक्ता महेश्वरः | परमात्मेति चाप्युक्तो देहेऽस्मिन्पुरुषः परः || २३ ||
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
15 पदउपद्रष्टा
साक्षी
अनुमन्ता
अनुमति देने वाला
च
और
भर्ता
पालन करने वाला
भोक्ता
भोक्ता
महेश्वर
महेश्वर
परमात्मा
परमात्मा
इति
इस प्रकार
च
भी
अपि
और
उक्त
कहा गया
देहे
शरीर में
अस्मिन्
इस
पुरुष
पुरुष
पर
परम
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
इस शरीर में स्थित यह परम पुरुष उपद्रष्टा (साक्षी), अनुमन्ता, भर्ता, भोक्ता, महेश्वर और परमात्मा भी कहा गया है।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
परमात्मा के विभिन्न नाम उसके विभिन्न कार्यों का बोध कराते हैं – वह साक्षी है, अनुमति देने वाला है, पालनकर्ता है, भोक्ता है, स्वामी है और परम आत्मा है। The various names of the Supreme indicate His different functions: witness, permitter, supporter, experiencer, Lord, and Supreme Self.
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
इस शरीर में स्थित परम पुरुष उपद्रष्टा (साक्षी), अनुमन्ता, भर्ता, भोक्ता, महेश्वर और परमात्मा भी कहा जाता है।
The Supreme Purusha in this body is also called the Witness, the Permitter, the Supporter, the Experiencer, the Great Lord, and the Supreme Self.
आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message
परमात्मा हमारे शरीर में साक्षी रूप में विद्यमान है। उसका साक्षात्कार ही जीवन का लक्ष्य है।
The Supreme exists in our body as the witness. Realizing Him is the goal of life.