मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
य एवं वेत्ति पुरुषं प्रकृतिं च गुणैः सह | सर्वथा वर्तमानोऽपि न स भूयोऽभिजायते || २४ ||
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
15 पदय
जो
एवम्
इस प्रकार
वेत्ति
जानता है
पुरुषम्
पुरुष को
प्रकृतिम्
प्रकृति को
च
और
गुणै
गुणों के साथ
सह
सहित
सर्वथा
सब प्रकार से
वर्तमान
बर्ताव करता हुआ
अपि
भी
न
नहीं
स
वह
भूय
फिर
अभिजायते
जन्मता
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
जो इस प्रकार पुरुष और प्रकृति को गुणों सहित जान लेता है, वह सब प्रकार से बर्ताव करता हुआ भी फिर जन्म नहीं पाता।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
यह ज्ञान मुक्तिदायक है। इस ज्ञान को प्राप्त व्यक्ति कैसा भी जीवन जिए, वह पुनर्जन्म से मुक्त हो जाता है। This knowledge is liberating. One who possesses it is freed from rebirth, regardless of how he lives.
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
जो इस प्रकार पुरुष और प्रकृति को उनके गुणों सहित जान लेता है, वह कैसा भी जीवन जीते हुए फिर जन्म नहीं पाता।
He who thus knows the Purusha and Prakriti together with the qualities, whatever way he may live, he is not born again.
आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message
आत्मज्ञान ही परम मुक्ति है। इसके बाद कर्म बंधन नहीं बनाते।
Self-knowledge is the highest liberation. Thereafter, actions do not bind.