श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 13 (क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग (Kshetra Kshetragya Vibhag Yoga))

अध्याय 13 · श्लोक 24

क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग (Kshetra Kshetragya Vibhag Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 35 3 मिनट का पठन 107 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
य एवं वेत्ति पुरुषं प्रकृतिं च गुणैः सह | सर्वथा वर्तमानोऽपि न स भूयोऽभिजायते || २४ ||

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

15 पद
य
जो
एवम्
इस प्रकार
वेत्ति
जानता है
पुरुषम्
पुरुष को
प्रकृतिम्
प्रकृति को
च
और
गुणै
गुणों के साथ
सह
सहित
सर्वथा
सब प्रकार से
वर्तमान
बर्ताव करता हुआ
अपि
भी
न
नहीं
स
वह
भूय
फिर
अभिजायते
जन्मता

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

जो इस प्रकार पुरुष और प्रकृति को गुणों सहित जान लेता है, वह सब प्रकार से बर्ताव करता हुआ भी फिर जन्म नहीं पाता।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

यह ज्ञान मुक्तिदायक है। इस ज्ञान को प्राप्त व्यक्ति कैसा भी जीवन जिए, वह पुनर्जन्म से मुक्त हो जाता है। This knowledge is liberating. One who possesses it is freed from rebirth, regardless of how he lives.

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

जो इस प्रकार पुरुष और प्रकृति को उनके गुणों सहित जान लेता है, वह कैसा भी जीवन जीते हुए फिर जन्म नहीं पाता।

He who thus knows the Purusha and Prakriti together with the qualities, whatever way he may live, he is not born again.

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

आत्मज्ञान ही परम मुक्ति है। इसके बाद कर्म बंधन नहीं बनाते।

Self-knowledge is the highest liberation. Thereafter, actions do not bind.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 13: क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग (Kshetra Kshetragya Vibhag Yoga)
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श्लोक 24/35 69% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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