श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 13 (क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग (Kshetra Kshetragya Vibhag Yoga))

अध्याय 13 · श्लोक 25

क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग (Kshetra Kshetragya Vibhag Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 35 3 मिनट का पठन 112 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
ध्यानेनात्मनि पश्यन्ति केचिदात्मानमात्मना | अन्ये साङ्ख्येन योगेन कर्मयोगेन चापरे || २५ ||

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

12 पद
ध्यानेन
ध्यान द्वारा
आत्मनि
अपने में
पश्यन्ति
देखते हैं
केचित्
कुछ लोग
आत्मानम्
आत्मा को
आत्मना
अपने मन से
अन्ये
अन्य
साङ्ख्येन
सांख्य योग से
योगेन
योग द्वारा
कर्मयोगेन
कर्मयोग से
च
और
अपरे
दूसरे

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

कुछ लोग ध्यान द्वारा अपने मन से अपने में आत्मा को देखते हैं, अन्य लोग सांख्ययोग द्वारा और दूसरे लोग कर्मयोग द्वारा।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

यहाँ आत्मसाक्षात्कार के तीन मार्ग बताए गए हैं – ध्यानयोग, सांख्ययोग और कर्मयोग। Three paths to self-realization are mentioned here: meditation, knowledge, and action.

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

कुछ लोग ध्यान द्वारा अपने मन से अपने में आत्मा को देखते हैं, अन्य सांख्ययोग (ज्ञानयोग) द्वारा, और कुछ कर्मयोग द्वारा।

Some by meditation behold the Self in the self through the self; others by the Yoga of knowledge; and others by the Yoga of action.

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

आत्मसाक्षात्कार के अनेक मार्ग हैं, साधक अपनी रुचि के अनुसार किसी भी मार्ग से लक्ष्य तक पहुँच सकता है।

There are many paths to self-realization; a seeker can reach the goal by any path according to his inclination.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 13: क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग (Kshetra Kshetragya Vibhag Yoga)
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श्लोक 25/35 71% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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