मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
अन्ये त्वेवमजानन्तः श्रुत्वान्येभ्य उपासते | तेऽपि चातितरन्त्येव मृत्युं श्रुतिपरायणाः || २६ ||
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
14 पदअन्ये
अन्य
तु
तो
एवम्
इस प्रकार
अजानन्त
न जानते हुए
श्रुत्वा
सुनकर
अन्येभ्य
दूसरों से
उपासते
उपासना करते हैं
ते
वे
अपि
भी
च
और
अतितरन्ति
पार हो जाते हैं
एव
ही
मृत्युम्
मृत्यु से
श्रुतिपरायणा
श्रवण में तत्पर
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
किन्तु अन्य लोग, जो इस प्रकार नहीं जानते, दूसरों से सुनकर ही उपासना करते हैं। वे भी श्रवण में तत्पर होकर मृत्यु से पार हो जाते हैं।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
यहाँ उन साधकों का उल्लेख है जो श्रद्धापूर्वक गुरु या शास्त्र से सुने हुए मार्ग का अनुसरण करते हैं और मुक्ति प्राप्त करते हैं। This refers to those who follow the path heard from others with faith and attain liberation.
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
परंतु अन्य लोग, जो इस प्रकार नहीं जानते, वे दूसरों से सुनकर उपासना करते हैं। वे भी श्रवण में तत्पर होकर मृत्यु से पार हो जाते हैं।
Others, however, not knowing thus, worship as they have heard from others. Even these cross beyond death by their devotion to what they have heard.
आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message
श्रद्धा और श्रवण का महत्व – बिना प्रत्यक्ष ज्ञान के भी सच्ची श्रद्धा मुक्ति दिला सकती है।
The importance of faith and hearing – even without direct knowledge, sincere faith can lead to liberation.