श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 13 (क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग (Kshetra Kshetragya Vibhag Yoga))

अध्याय 13 · श्लोक 28

क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग (Kshetra Kshetragya Vibhag Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 35 3 मिनट का पठन 110 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
समं सर्वेषु भूतेषु तिष्ठन्तं परमेश्वरम् | विनश्यत्स्वविनश्यन्तं यः पश्यति स पश्यति || २८ ||

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

11 पद
समम्
समान
सर्वेषु
सब
भूतेषु
भूतों में
तिष्ठन्तम्
स्थित
परमेश्वरम्
परमेश्वर को
विनश्यत्सु
नष्ट होने वालों में
अविनश्यन्तम्
न नष्ट होने वाले
य
जो
पश्यति
देखता है
स
वह
पश्यति
देखता है

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

जो सब प्राणियों में समान रूप से स्थित, अविनाशी परमेश्वर को विनश्वर प्राणियों के बीच देखता है, वही यथार्थ देखता है।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

वास्तविक दृष्टि वह है जो समस्त प्राणियों में एक ही अविनाशी परमेश्वर को देखती है। True vision is seeing the one Imperishable Lord equally in all perishable beings.

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

जो सब प्राणियों में समान रूप से स्थित, अविनाशी परमेश्वर को नष्ट होने वाले प्राणियों के बीच देखता है, वही यथार्थ देखता है।

He who sees the Supreme Lord, existing equally in all beings, the Imperishable among the perishing, he alone sees indeed.

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

ईश्वर सबमें एक समान है। भेद केवल शरीरों का है।

God is equally present in all. The differences are only of bodies.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 13: क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग (Kshetra Kshetragya Vibhag Yoga)
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श्लोक 28/35 80% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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