मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
प्रकृत्यैव च कर्माणि क्रियमाणानि सर्वशः | यः पश्यति तथात्मानमकर्तारं स पश्यति || ३० ||
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
13 पदप्रकृत्या
प्रकृति द्वारा
एव
ही
च
और
कर्माणि
कर्म
क्रियमाणानि
किये जाते हुए
सर्वशः
सब प्रकार से
य
जो
पश्यति
देखता है
तथा
तथा
आत्मानम्
आत्मा को
अकर्तारम्
अकर्ता
स
वह
पश्यति
देखता है
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
जो यह देखता है कि सम्पूर्ण कर्म प्रकृति द्वारा ही किये जा रहे हैं और आत्मा अकर्ता है, वही यथार्थ देखता है।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
यथार्थ दृष्टि वह है जिसमें सभी क्रियाएँ प्रकृति को अर्पित कर दी जाती हैं और आत्मा को निर्लिप्त देखा जाता है। True vision is attributing all actions to Prakriti and seeing the Self as actionless.
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
जो यह देखता है कि सम्पूर्ण कर्म प्रकृति द्वारा ही किये जा रहे हैं और आत्मा अकर्ता है, वही यथार्थ देखता है।
He who sees that all actions are performed by Prakriti alone, and that the Self is actionless, he alone sees (the truth).
आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message
आत्मा नित्य अकर्ता है, सभी क्रियाएँ प्रकृति की हैं। यह विवेक ही बंधन से मुक्त कराता है।
The Self is eternally actionless; all actions belong to Prakriti. This discernment liberates one from bondage.