श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 13 (क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग (Kshetra Kshetragya Vibhag Yoga))

अध्याय 13 · श्लोक 4

क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग (Kshetra Kshetragya Vibhag Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 35 3 मिनट का पठन 107 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
तत्क्षेत्रं यच्च यादृक्च यद्विकारि यतश्च यत् | स च यो यत्प्रभावश्च तत्समासेन मे शृणु || ४ ||

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

19 पद
तत्
वह
क्षेत्रम्
क्षेत्र
यत्
जो
च
और
यादृक्
जैसा
च
भी
यद्विकारि
जिसके विकार हैं
यतः
जिससे
च
और
यत्
जो
स
वह
च
और
य
जो
यत्प्रभाव
जिसका प्रभाव
च
और
तत्
उसको
समासेन
संक्षेप में
मे
मुझसे
शृणु
सुन

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

वह क्षेत्र क्या है, कैसा है, उसके क्या विकार हैं और किस कारण से क्या हुआ है, तथा वह (क्षेत्रज्ञ) कौन है और उसके क्या प्रभाव हैं – यह सब संक्षेप में मुझसे सुन।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

भगवान अब क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ के स्वरूप, उनके गुणों और प्रभावों का संक्षिप्त विवरण देने का वचन देते हैं। The Lord promises to briefly describe the nature, modifications, and powers of both the field and its knower.

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

भगवान कहते हैं: उस क्षेत्र को, उसके स्वरूप को, उसके विकारों को, उसके कारण को, तथा क्षेत्रज्ञ को और उसके प्रभाव को संक्षेप में मुझसे सुनो।

The Lord says: Hear from Me in brief about the field, its nature, modifications, cause, and about the knower and His powers.

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

गुरु के मुख से तत्वज्ञान सुनने की उत्कंठा आवश्यक है।

Eagerness to hear the truth from a realized teacher is essential.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 13: क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग (Kshetra Kshetragya Vibhag Yoga)
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श्लोक 4/35 11% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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