श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 13 (क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग (Kshetra Kshetragya Vibhag Yoga))

अध्याय 13 · श्लोक 5

क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग (Kshetra Kshetragya Vibhag Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 35 3 मिनट का पठन 111 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
ऋषिभिर्बहुधा गीतं छन्दोभिर्विविधैः पृथक् | ब्रह्मसूत्रपदैश्चैव हेतुमद्भिर्विनिश्चितैः || ५ ||

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

11 पद
ऋषिभि
ऋषियों द्वारा
बहुधा
अनेक प्रकार से
गीतम्
कहा गया
छन्दोभि
वेदों के मंत्रों द्वारा
विविधै
विविध
पृथक्
अलग-अलग
ब्रह्मसूत्रपदै
ब्रह्मसूत्र के पदों द्वारा
च
और
एव
ही
हेतुमद्भि
युक्तियुक्त
विनिश्चितै
निश्चय किए हुए

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

इस विषय को ऋषियों ने अनेक प्रकार से कहा है, तथा विविध वैदिक मंत्रों द्वारा भी और युक्तियुक्त तथा निश्चयात्मक ब्रह्मसूत्र के पदों द्वारा भी (गाया गया है)।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

भगवान बताते हैं कि क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ का ज्ञान ऋषियों, वेदों और ब्रह्मसूत्रों में विस्तार से वर्णित है। The Lord indicates that the knowledge of the field and its knower is elaborately explained by sages, in Vedic hymns, and in the Brahma-Sutras.

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

इस ज्ञान को ऋषियों ने अनेक प्रकार से, वैदिक मंत्रों द्वारा और ब्रह्मसूत्र के युक्तियुक्त निर्णयों द्वारा गाया है।

This knowledge has been sung by sages in various ways, by Vedic hymns, and by the conclusive reasoning of the Brahma-Sutras.

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

शास्त्र और महापुरुषों के वचन प्रमाण हैं। उनका अध्ययन आवश्यक है।

Scriptures and words of great sages are authoritative. Their study is necessary.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 13: क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग (Kshetra Kshetragya Vibhag Yoga)
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श्लोक 5/35 14% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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