श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 13 (क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग (Kshetra Kshetragya Vibhag Yoga))

अध्याय 13 · श्लोक 6

क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग (Kshetra Kshetragya Vibhag Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 35 3 मिनट का पठन 106 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
महाभूतान्यहङ्कारो बुद्धिरव्यक्तमेव च | इन्द्रियाणि दशैकं च पञ्च चेन्द्रियगोचराः || ६ ||

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

13 पद
महाभूतानि
पंच महाभूत
अहङ्कार
अहंकार
बुद्धि
बुद्धि
अव्यक्तम्
अव्यक्त (मूल प्रकृति)
एव
ही
च
और
इन्द्रियाणि
इन्द्रियाँ
दश
दस
एकम्
एक (मन)
च
तथा
पञ्च
पाँच
च
और
इन्द्रियगोचरा
इन्द्रियों के विषय

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

पंच महाभूत, अहंकार, बुद्धि और अव्यक्त (मूल प्रकृति), दस इन्द्रियाँ, एक (मन) तथा पाँच इन्द्रियों के विषय –

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

यह श्लोक क्षेत्र (शरीर) के घटकों की गणना प्रारम्भ करता है। इसमें स्थूल और सूक्ष्म तत्वों का उल्लेख है। This verse begins listing the constituents of the field (body), including gross and subtle elements.

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

पाँच महाभूत, अहंकार, बुद्धि, अव्यक्त प्रकृति, दस इन्द्रियाँ, मन और पाँच इन्द्रियविषय – ये सब क्षेत्र के अंग हैं।

The five great elements, ego, intellect, the unmanifested, the ten senses, mind, and the five sense-objects – these are parts of the field.

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

यह संसार इन्हीं तत्वों से बना है, इनसे परे आत्मा है।

The world is composed of these elements; beyond them is the Self.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 13: क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग (Kshetra Kshetragya Vibhag Yoga)
वर्तमान में आप श्लोक संख्या 6 का अध्ययन कर रहे हैं।
श्लोक 6/35 17% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
श्लोक कॉपी कर लिया गया है!