मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
महाभूतान्यहङ्कारो बुद्धिरव्यक्तमेव च | इन्द्रियाणि दशैकं च पञ्च चेन्द्रियगोचराः || ६ ||
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
13 पदमहाभूतानि
पंच महाभूत
अहङ्कार
अहंकार
बुद्धि
बुद्धि
अव्यक्तम्
अव्यक्त (मूल प्रकृति)
एव
ही
च
और
इन्द्रियाणि
इन्द्रियाँ
दश
दस
एकम्
एक (मन)
च
तथा
पञ्च
पाँच
च
और
इन्द्रियगोचरा
इन्द्रियों के विषय
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
पंच महाभूत, अहंकार, बुद्धि और अव्यक्त (मूल प्रकृति), दस इन्द्रियाँ, एक (मन) तथा पाँच इन्द्रियों के विषय –
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
यह श्लोक क्षेत्र (शरीर) के घटकों की गणना प्रारम्भ करता है। इसमें स्थूल और सूक्ष्म तत्वों का उल्लेख है। This verse begins listing the constituents of the field (body), including gross and subtle elements.
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
पाँच महाभूत, अहंकार, बुद्धि, अव्यक्त प्रकृति, दस इन्द्रियाँ, मन और पाँच इन्द्रियविषय – ये सब क्षेत्र के अंग हैं।
The five great elements, ego, intellect, the unmanifested, the ten senses, mind, and the five sense-objects – these are parts of the field.
आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message
यह संसार इन्हीं तत्वों से बना है, इनसे परे आत्मा है।
The world is composed of these elements; beyond them is the Self.