श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 13 (क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग (Kshetra Kshetragya Vibhag Yoga))

अध्याय 13 · श्लोक 7

क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग (Kshetra Kshetragya Vibhag Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 35 3 मिनट का पठन 105 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
इच्छा द्वेषः सुखं दुःखं सङ्घातश्चेतना धृतिः | एतत्क्षेत्रं समासेन सविकारमुदाहृतम् || ७ ||

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

12 पद
इच्छा
इच्छा
द्वेष
द्वेष
सुखम्
सुख
दुःखम्
दुःख
सङ्घात
समूह (शरीर)
चेतना
चेतना
धृति
धैर्य
एतत्
यह
क्षेत्रम्
क्षेत्र
समासेन
संक्षेप में
सविकारम्
विकारों सहित
उदाहृतम्
कहा गया

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

इच्छा, द्वेष, सुख, दुःख, सङ्घात (शरीर), चेतना और धृति – इस प्रकार यह क्षेत्र अपने विकारों सहित संक्षेप में कहा गया।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

इस श्लोक में क्षेत्र के भावात्मक पहलुओं का वर्णन है। ये सभी शरीर के धर्म हैं, आत्मा के नहीं। This verse describes the emotional and psychological aspects of the field, which belong to the body, not the Self.

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

इच्छा, द्वेष, सुख, दुःख, शरीर, चेतना और धैर्य – ये सब विकारों सहित क्षेत्र के लक्षण हैं।

Desire, hatred, pleasure, pain, the body, consciousness, and fortitude – these along with modifications constitute the field.

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

ये सभी मानसिक और शारीरिक अवस्थाएँ क्षेत्र (शरीर) की हैं, आत्मा इनसे अलिप्त है।

All these mental and physical states belong to the field; the Self is untouched by them.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 13: क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग (Kshetra Kshetragya Vibhag Yoga)
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श्लोक 7/35 20% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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