श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 13 (क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग (Kshetra Kshetragya Vibhag Yoga))

अध्याय 13 · श्लोक 8

क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग (Kshetra Kshetragya Vibhag Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 35 3 मिनट का पठन 117 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
अमानित्वमदम्भित्वमहिंसा क्षान्तिरार्जवम् | आचार्योपासनं शौचं स्थैर्यमात्मविनिग्रहः || ८ ||

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

9 पद
अमानित्वम्
मान का अभाव
अदम्भित्वम्
दम्भ का अभाव
अहिंसा
अहिंसा
क्षान्ति
सहनशीलता
आर्जवम्
सरलता
आचार्योपासनम्
आचार्य की सेवा
शौचम्
पवित्रता
स्थैर्यम्
स्थिरता
आत्मविनिग्रह
मन का निग्रह

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

मान का अभाव (अमानित्व), दम्भ का अभाव, अहिंसा, क्षमा, सरलता, आचार्य की सेवा, शौच, स्थिरता और आत्म-निग्रह –

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

अब ज्ञान के साधनों का वर्णन शुरू होता है। ये सद्गुण ज्ञान प्राप्ति के लिए आवश्यक हैं। Now begins the description of the means to knowledge. These virtues are necessary for attaining wisdom.

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

अमानित्व, अदम्भित्व, अहिंसा, क्षान्ति, आर्जव, आचार्योपासन, शौच, स्थैर्य और आत्मविनिग्रह – ये ज्ञान के लक्षण हैं।

Humility, unpretentiousness, non-injury, forgiveness, uprightness, service to the teacher, purity, steadfastness, self-control – these are the marks of knowledge.

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

इन सद्गुणों के बिना ज्ञान नहीं मिलता। इन्हें विकसित करना चाहिए।

Without these virtues, knowledge cannot be attained. They must be cultivated.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 13: क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग (Kshetra Kshetragya Vibhag Yoga)
वर्तमान में आप श्लोक संख्या 8 का अध्ययन कर रहे हैं।
श्लोक 8/35 23% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
श्लोक कॉपी कर लिया गया है!