श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 14 (गुणत्रय विभाग योग (Gunatraya Vibhaga Yoga))

अध्याय 14 · श्लोक 10

गुणत्रय विभाग योग (Gunatraya Vibhaga Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 27 3 मिनट का पठन 117 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
रजस्तमश्चाभिभूय सत्त्वं भवति भारत । रजः सत्त्वं तमश्चैव तमः सत्त्वं रजस्तथा ॥ १०॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

13 पद
रजः-तमः
रज और तम को
च
और
अभिभूय
अभिभूत करके
सत्त्वम्
सत्त्व गुण
भवति
होता है (बढ़ता है)
भारत
हे भारत
रजः
रज
सत्त्वम्-तमः
सत्त्व और तम को
च
और
एव
ही
तमः
तम
सत्त्वम्-रजः
सत्त्व और रज को
तथा
इसी प्रकार।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

हे भारत! कभी रज और तम को दबाकर सत्त्व गुण बढ़ता है, कभी सत्त्व और तम को दबाकर रजोगुण बढ़ता है, और कभी सत्त्व और रज को दबाकर तमोगुण बढ़ता है।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

ये तीनों गुण परस्पर स्पर्धा करते हैं। किसी समय कोई एक प्रबल हो जाता है। The three gunas constantly compete; at any given time, one dominates the others.

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

भगवान कहते हैं कि कभी सत्त्व गुण रज और तम को दबाकर बढ़ता है, कभी रज सत्त्व और तम को, और कभी तम सत्त्व और रज को दबाकर बढ़ता है। Sometimes Sattva prevails by overpowering Rajas and Tamas; similarly Rajas or Tamas prevail at other times.

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

मनुष्य के व्यवहार में ये गुण बदलते रहते हैं। साधना द्वारा सत्त्व को बढ़ाना और अंततः तीनों को पार करना चाहिए। These gunas constantly shift in human behavior; one should cultivate Sattva and ultimately transcend all three.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 14: गुणत्रय विभाग योग (Gunatraya Vibhaga Yoga)
वर्तमान में आप श्लोक संख्या 10 का अध्ययन कर रहे हैं।
श्लोक 10/27 37% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
श्लोक कॉपी कर लिया गया है!