श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 14 (गुणत्रय विभाग योग (Gunatraya Vibhaga Yoga))

अध्याय 14 · श्लोक 9

गुणत्रय विभाग योग (Gunatraya Vibhaga Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 27 3 मिनट का पठन 111 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
सत्त्वं सुखे संजयति रजः कर्मणि भारत । ज्ञानमावृत्य तु तमः प्रमादे संजयत्युत ॥ ९॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

13 पद
सत्त्वम्
सत्त्व गुण
सुखे
सुख में
संजयति
बांधता है
रजः
रजोगुण
कर्मणि
कर्म में
भारत
हे भारत
ज्ञानम्
ज्ञान को
आवृत्य
आच्छादित करके
तु
तो
तमः
तमोगुण
प्रमादे
प्रमाद में
संजयति
बांधता है
उत
भी।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

हे भारत! सत्त्व गुण सुख में बाँधता है, रजोगुण कर्म में बाँधता है, और तमोगुण ज्ञान को ढककर प्रमाद में बाँधता है।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

प्रत्येक गुण का अपना बंधन है - सत्त्व सुख में, रज कर्म में, तम प्रमाद में। Each guna binds in its own way: Sattva to happiness, Rajas to action, Tamas to delusion.

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

भगवान अर्जुन से कहते हैं कि सत्त्व सुख में बांधता है, रज कर्म में, और तम ज्ञान को ढककर प्रमाद में बांधता है। Sattva binds through attachment to happiness, Rajas through attachment to action, and Tamas by covering knowledge leads to heedlessness.

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

हर गुण मनुष्य को किसी न किसी प्रकार से बांधता है। इनसे परे जाना ही मुक्ति है। Each guna binds the soul in its own way; transcendence of all three is liberation.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 14: गुणत्रय विभाग योग (Gunatraya Vibhaga Yoga)
वर्तमान में आप श्लोक संख्या 9 का अध्ययन कर रहे हैं।
श्लोक 9/27 33% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
श्लोक कॉपी कर लिया गया है!