श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 14 (गुणत्रय विभाग योग (Gunatraya Vibhaga Yoga))

अध्याय 14 · श्लोक 8

गुणत्रय विभाग योग (Gunatraya Vibhaga Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 27 3 मिनट का पठन 124 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
तमस्त्वज्ञानजं विद्धि मोहनं सर्वदेहिनाम् । प्रमादालस्यनिद्राभिस्तन्निबध्नाति भारत ॥ ८॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

10 पद
तमः
तमोगुण
तु
तो
अज्ञानजम्
अज्ञान से उत्पन्न
विद्धि
जानो
मोहनम्
मोहित करने वाला
सर्वदेहिनाम्
सब देहधारियों को
प्रमाद-आलस्य-निद्राभिः
प्रमाद, आलस्य और निद्रा से
तत्
वह
निबध्नाति
बांधता है
भारत
हे भारत।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

हे भारत! तमोगुण को अज्ञान से उत्पन्न और सब देहधारियों को मोहित करने वाला जानो। वह प्रमाद, आलस्य और निद्रा के द्वारा बांधता है।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

तमोगुण अज्ञान और मोह का कारण है। यह आलस्य और निद्रा के रूप में बांधता है। Tamas is born of ignorance, causing delusion; it binds through negligence, laziness, and sleep.

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

भगवान कहते हैं कि तमोगुण अज्ञान से उत्पन्न है और समस्त देहधारियों को मोहित करता है। हे भारत! यह प्रमाद, आलस्य और निद्रा के द्वारा जीव को बांधता है। Know Tamas as born of ignorance, deluding all embodied beings; it binds through heedlessness, laziness, and sleep.

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

तमोगुण में व्यक्ति आलसी, अज्ञानी और मोहित रहता है। इससे ऊपर उठना आवश्यक है। Under Tamas, one remains lazy, ignorant, and deluded; one must rise above it.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 14: गुणत्रय विभाग योग (Gunatraya Vibhaga Yoga)
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श्लोक 8/27 30% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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