मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
तमस्त्वज्ञानजं विद्धि मोहनं सर्वदेहिनाम् । प्रमादालस्यनिद्राभिस्तन्निबध्नाति भारत ॥ ८॥
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
10 पदतमः
तमोगुण
तु
तो
अज्ञानजम्
अज्ञान से उत्पन्न
विद्धि
जानो
मोहनम्
मोहित करने वाला
सर्वदेहिनाम्
सब देहधारियों को
प्रमाद-आलस्य-निद्राभिः
प्रमाद, आलस्य और निद्रा से
तत्
वह
निबध्नाति
बांधता है
भारत
हे भारत।
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
हे भारत! तमोगुण को अज्ञान से उत्पन्न और सब देहधारियों को मोहित करने वाला जानो। वह प्रमाद, आलस्य और निद्रा के द्वारा बांधता है।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
तमोगुण अज्ञान और मोह का कारण है। यह आलस्य और निद्रा के रूप में बांधता है। Tamas is born of ignorance, causing delusion; it binds through negligence, laziness, and sleep.
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
भगवान कहते हैं कि तमोगुण अज्ञान से उत्पन्न है और समस्त देहधारियों को मोहित करता है। हे भारत! यह प्रमाद, आलस्य और निद्रा के द्वारा जीव को बांधता है। Know Tamas as born of ignorance, deluding all embodied beings; it binds through heedlessness, laziness, and sleep.
आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message
तमोगुण में व्यक्ति आलसी, अज्ञानी और मोहित रहता है। इससे ऊपर उठना आवश्यक है। Under Tamas, one remains lazy, ignorant, and deluded; one must rise above it.