मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
सर्वद्वारेषु देहेऽस्मिन्प्रकाश उपजायते । ज्ञानं यदा तदा विद्याद्विवृद्धं सत्त्वमित्युत ॥ ११॥
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
12 पदसर्वद्वारेषु
सब इंद्रियों के द्वारों में
देहे अस्मिन्
इस शरीर में
प्रकाश
प्रकाश
उपजायते
उत्पन्न होता है
ज्ञानम्
ज्ञान
यदा
जब
तदा
तब
विद्यात्
जानना चाहिए
विवृद्धम्
बढ़ा हुआ
सत्त्वम्
सत्त्व गुण
इति
इस प्रकार
उत
निश्चय ही।
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
जब इस शरीर के सभी द्वारों (इंद्रियों) में प्रकाश (बुद्धि का प्रकाश) उत्पन्न होता है, तब जानना चाहिए कि सत्त्व गुण बढ़ा हुआ है।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
सत्त्व के बढ़ने पर बुद्धि का प्रकाश सभी इंद्रियों में फैलता है। When Sattva increases, the light of knowledge shines through all senses.
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
भगवान कहते हैं कि जब इस शरीर के सभी इंद्रिय-द्वारों में ज्ञान का प्रकाश दिखाई देता है, तब समझना चाहिए कि सत्त्व गुण बढ़ गया है। When the light of intelligence shines through all the gates of the body, then one should know that Sattva is predominant.
आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message
सत्त्व के बढ़ने पर मनुष्य ज्ञानी, शांत और विवेकशील हो जाता है। With the rise of Sattva, one becomes wise, calm, and discerning.