मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
अप्रकाशोऽप्रवृत्तिश्च प्रमादो मोह एव च । तमस्येतानि जायन्ते विवृद्धे कुरुनन्दन ॥ १३॥
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
12 पदअप्रकाशः
अप्रकाश (ज्ञान का अभाव)
अप्रवृत्तिः
अप्रवृत्ति
च
और
प्रमादः
प्रमाद
मोहः
मोह
एव
ही
च
और
तमसि
तमोगुण में
एतानि
ये
जायन्ते
उत्पन्न होते हैं
विवृद्धे
बढ़े हुए
कुरुनन्दन
हे कुरुनन्दन।
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
हे कुरुनन्दन! तमोगुण के बढ़ने पर अप्रकाश (ज्ञान का अभाव), अप्रवृत्ति, प्रमाद और मोह उत्पन्न होते हैं।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
तमोगुण के लक्षण: अज्ञान, आलस्य, प्रमाद और मोह। Signs of Tamas: ignorance, inactivity, carelessness, and delusion.
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
भगवान कहते हैं कि हे कुरुनन्दन! जब तमोगुण बढ़ता है तो अप्रकाश (अज्ञान), अप्रवृत्ति, प्रमाद और मोह उत्पन्न होते हैं। When Tamas increases, there is darkness (ignorance), inactivity, carelessness, and delusion.
आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message
तमोगुण के बढ़ने पर व्यक्ति आलसी, मूढ़ और भ्रमित रहता है। Under Tamas, one becomes lazy, deluded, and confused.