श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 14 (गुणत्रय विभाग योग (Gunatraya Vibhaga Yoga))

अध्याय 14 · श्लोक 14

गुणत्रय विभाग योग (Gunatraya Vibhaga Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 27 3 मिनट का पठन 108 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
यदा सत्त्वे प्रवृद्धे तु प्रलयं याति देहभृत् । तदोत्तमविदां लोकानमलान्प्रतिपद्यते ॥ १४॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

12 पद
यदा
जब
सत्त्वे
सत्त्व गुण में
प्रवृद्धे
बढ़े हुए
तु
तो
प्रलयम्
मृत्यु को
याति
जाता है
देहभृत्
देहधारी
तदा
तब
उत्तमविदाम्
उत्तम ज्ञानियों के
लोकान्
लोकों को
अमलान्
निर्मल
प्रतिपद्यते
प्राप्त होता है।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

जब सत्त्व गुण के बढ़े रहते हुए देहधारी की मृत्यु होती है, तब वह उत्तम ज्ञानियों के निर्मल लोकों को प्राप्त होता है।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

सत्त्व के प्रबल होने पर मरने वाला उच्च लोकों में जाता है। If one dies with Sattva predominant, they go to higher, pure worlds.

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

भगवान कहते हैं कि जब सत्त्व गुण बढ़ा हुआ हो और उस समय देहधारी की मृत्यु हो, तो वह उत्तम ज्ञानियों के निर्मल लोकों को प्राप्त होता है। When one dies with Sattva predominant, they attain the spotless worlds of the knowers of the Highest.

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

अतः सदा सत्त्व बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए, जिससे अन्तकाल में शुभ गति मिले। Therefore, one should always strive to increase Sattva to ensure a good destination at death.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 14: गुणत्रय विभाग योग (Gunatraya Vibhaga Yoga)
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सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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