श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 14 (गुणत्रय विभाग योग (Gunatraya Vibhaga Yoga))

अध्याय 14 · श्लोक 15

गुणत्रय विभाग योग (Gunatraya Vibhaga Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 27 3 मिनट का पठन 107 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
रजसि प्रलयं गत्वा कर्मसङ्गिषु जायते । तथा प्रलीनस्तमसि मूढयोनिषु जायते ॥ १५॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

10 पद
रजसि
रजोगुण में
प्रलयम्
मृत्यु
गत्वा
प्राप्त होकर
कर्मसङ्गिषु
कर्मों में आसक्त मनुष्यों में
जायते
जन्म लेता है
तथा
इसी प्रकार
प्रलीनः
प्रलय को प्राप्त
तमसि
तमोगुण में
मूढयोनिषु
मूढ़ योनियों में
जायते
जन्म लेता है।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

रजोगुण में मृत्यु पाकर वह कर्मों में आसक्त मनुष्यों में जन्म लेता है, और तमोगुण में मरकर मूढ़ योनियों में जन्म लेता है।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

रज में मरने वाला कर्मलोक में जाता है; तम में मरने वाला नीच योनियों में। Death in Rajas leads to birth among those attached to action; death in Tamas leads to lower births.

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

भगवान कहते हैं कि रजोगुण में मृत्यु होने पर व्यक्ति कर्मों में आसक्त मनुष्यों में जन्म लेता है, और तमोगुण में मरने पर मूढ़ योनियों (पशु आदि) में जन्म लेता है। Dying in Rajas, one is born among those attached to action; dying in Tamas, one is born in deluded wombs.

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

अतः मनुष्य को चाहिए कि वह अपने गुणों को सुधारे और सत्त्व बढ़ाए, ताकि उत्तम गति प्राप्त हो। Hence, one should refine one's nature and cultivate Sattva for a better future.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 14: गुणत्रय विभाग योग (Gunatraya Vibhaga Yoga)
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श्लोक 15/27 56% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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