मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
रजसि प्रलयं गत्वा कर्मसङ्गिषु जायते । तथा प्रलीनस्तमसि मूढयोनिषु जायते ॥ १५॥
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
10 पदरजसि
रजोगुण में
प्रलयम्
मृत्यु
गत्वा
प्राप्त होकर
कर्मसङ्गिषु
कर्मों में आसक्त मनुष्यों में
जायते
जन्म लेता है
तथा
इसी प्रकार
प्रलीनः
प्रलय को प्राप्त
तमसि
तमोगुण में
मूढयोनिषु
मूढ़ योनियों में
जायते
जन्म लेता है।
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
रजोगुण में मृत्यु पाकर वह कर्मों में आसक्त मनुष्यों में जन्म लेता है, और तमोगुण में मरकर मूढ़ योनियों में जन्म लेता है।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
रज में मरने वाला कर्मलोक में जाता है; तम में मरने वाला नीच योनियों में। Death in Rajas leads to birth among those attached to action; death in Tamas leads to lower births.
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
भगवान कहते हैं कि रजोगुण में मृत्यु होने पर व्यक्ति कर्मों में आसक्त मनुष्यों में जन्म लेता है, और तमोगुण में मरने पर मूढ़ योनियों (पशु आदि) में जन्म लेता है। Dying in Rajas, one is born among those attached to action; dying in Tamas, one is born in deluded wombs.
आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message
अतः मनुष्य को चाहिए कि वह अपने गुणों को सुधारे और सत्त्व बढ़ाए, ताकि उत्तम गति प्राप्त हो। Hence, one should refine one's nature and cultivate Sattva for a better future.