श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 14 (गुणत्रय विभाग योग (Gunatraya Vibhaga Yoga))

अध्याय 14 · श्लोक 18

गुणत्रय विभाग योग (Gunatraya Vibhaga Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 27 3 मिनट का पठन 137 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
ऊर्ध्वं गच्छन्ति सत्त्वस्था मध्ये तिष्ठन्ति राजसाः । जघन्यगुणवृत्तिस्था अधो गच्छन्ति तामसाः ॥ १८॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

10 पद
ऊर्ध्वम्
ऊपर
गच्छन्ति
जाते हैं
सत्त्वस्थाः
सत्त्व में स्थित
मध्ये
मध्य में
तिष्ठन्ति
रहते हैं
राजसाः
राजस लोग
जघन्य-गुण-वृत्तिस्थाः
निकृष्ट गुण और वृत्तियों में स्थित
अधः
नीचे
गच्छन्ति
जाते हैं
तामसाः
तामस लोग।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

सत्त्व में स्थित पुरुष ऊर्ध्वगति को प्राप्त होते हैं, राजस लोग मध्य में रहते हैं, और तामस लोग निकृष्ट गुण-वृत्तियों में स्थित होकर अधोगति को जाते हैं।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

गुणों के अनुसार गति भिन्न होती है: सात्त्विक ऊपर, राजस मध्य, तामस नीचे। The destination varies according to the predominant guna: Sattvic go higher, Rajasic remain in the middle, Tamasic go lower.

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

भगवान कहते हैं कि सत्त्वगुण में स्थित लोग ऊपर (देवलोक आदि) जाते हैं, राजस लोग मध्य (मनुष्यलोक) में रहते हैं, और तामस लोग नीचे (पशु-आदि योनियों) में जाते हैं। Those in Sattva go upward; the Rajasic stay in the middle; the Tamasic go downward.

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

मनुष्य अपने गुणों के अनुसार ही अपनी गति स्वयं निर्धारित करता है। A person determines their own destiny by the gunas they cultivate.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 14: गुणत्रय विभाग योग (Gunatraya Vibhaga Yoga)
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श्लोक 18/27 67% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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