मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
ऊर्ध्वं गच्छन्ति सत्त्वस्था मध्ये तिष्ठन्ति राजसाः । जघन्यगुणवृत्तिस्था अधो गच्छन्ति तामसाः ॥ १८॥
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
10 पदऊर्ध्वम्
ऊपर
गच्छन्ति
जाते हैं
सत्त्वस्थाः
सत्त्व में स्थित
मध्ये
मध्य में
तिष्ठन्ति
रहते हैं
राजसाः
राजस लोग
जघन्य-गुण-वृत्तिस्थाः
निकृष्ट गुण और वृत्तियों में स्थित
अधः
नीचे
गच्छन्ति
जाते हैं
तामसाः
तामस लोग।
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
सत्त्व में स्थित पुरुष ऊर्ध्वगति को प्राप्त होते हैं, राजस लोग मध्य में रहते हैं, और तामस लोग निकृष्ट गुण-वृत्तियों में स्थित होकर अधोगति को जाते हैं।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
गुणों के अनुसार गति भिन्न होती है: सात्त्विक ऊपर, राजस मध्य, तामस नीचे। The destination varies according to the predominant guna: Sattvic go higher, Rajasic remain in the middle, Tamasic go lower.
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
भगवान कहते हैं कि सत्त्वगुण में स्थित लोग ऊपर (देवलोक आदि) जाते हैं, राजस लोग मध्य (मनुष्यलोक) में रहते हैं, और तामस लोग नीचे (पशु-आदि योनियों) में जाते हैं। Those in Sattva go upward; the Rajasic stay in the middle; the Tamasic go downward.
आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message
मनुष्य अपने गुणों के अनुसार ही अपनी गति स्वयं निर्धारित करता है। A person determines their own destiny by the gunas they cultivate.