मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
गुणानेतानतीत्य त्रीन्देही देहसमुद्भवान् । जन्ममृत्युजरादुःखैर्विमुक्तोऽमृतमश्नुते ॥ २०॥
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
10 पदगुणान्
गुणों को
एतान्
इन
अतीत्य
अतिक्रम करके
त्रीन्
तीनों
देही
देहधारी
देहसमुद्भवान्
शरीर से उत्पन्न
जन्म-मृत्यु-जरा-दुःखैः
जन्म, मृत्यु, जरा और दुःखों से
विमुक्तः
मुक्त हुआ
अमृतम्
अमृत
अश्नुते
भोगता है (प्राप्त करता है)।
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
इन तीनों गुणों को, जो शरीर से उत्पन्न होते हैं, अतिक्रमण करके देही जन्म, मृत्यु, जरा और दुःखों से मुक्त होकर अमृत को प्राप्त होता है।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
गुणों के पार जाने पर आत्मा जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्त होकर अमरत्व प्राप्त करती है। By transcending the gunas, the soul becomes free from the cycle of birth and death and attains immortality.
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
भगवान कहते हैं कि इन तीनों गुणों को, जो शरीर से उत्पन्न हैं, पार करके देहधारी आत्मा जन्म, मृत्यु, जरा और दुःखों से मुक्त होकर अमृतत्व को प्राप्त होती है। Having transcended these three gunas, the embodied soul, freed from birth, death, old age, and pain, attains immortality.
आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message
गुणातीत होना ही मोक्ष का मार्ग है। Transcending the gunas is the path to liberation.