मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
अर्जुन उवाच । कैर्लिङ्गैस्त्रीन्गुणानेतानतीतो भवति प्रभो । किमाचारः कथं चैतांस्त्रीन्गुणानतिवर्तते ॥ २१॥
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
17 पदअर्जुन उवाच
अर्जुन ने कहा
कैः
किन
लिङ्गैः
लक्षणों से
त्रीन्
तीनों
गुणान्
गुणों
एतान्
इन
अतीतः
अतीत
भवति
होता है
प्रभो
हे प्रभो
किम्
कैसा
आचारः
आचरण
कथम्
कैसे
च
और
एतान्
इन
त्रीन्
तीनों
गुणान्
गुणों
अतिवर्तते
अतिक्रमण करता है।
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
अर्जुन ने पूछा: हे प्रभो! इन तीनों गुणों से अतीत पुरुष किन लक्षणों से पहचाना जाता है? उसका आचरण कैसा होता है? और वह इन तीनों गुणों को कैसे पार करता है?
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
अर्जुन अब गुणातीत पुरुष के लक्षण पूछते हैं। Arjuna now asks about the characteristics of one who has transcended the gunas.
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
अर्जुन ने कहा: हे प्रभो! वह पुरुष किन लक्षणों से जाना जाता है जो इन तीनों गुणों से परे हो गया है? उसका आचरण कैसा है? और वह इन तीनों गुणों को कैसे पार करता है? Arjuna asked: O Lord, by what marks is one who has transcended these three gunas known? What is his behavior? And how does he go beyond them?
आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message
गुणातीत अवस्था को जानने की उत्सुकता साधक के मार्ग का अंग है। The curiosity to know the state beyond gunas is part of the seeker's path.