श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 14 (गुणत्रय विभाग योग (Gunatraya Vibhaga Yoga))

अध्याय 14 · श्लोक 24

गुणत्रय विभाग योग (Gunatraya Vibhaga Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 27 3 मिनट का पठन 112 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
समदुःखसुखः स्वस्थः समलोष्टाश्मकाञ्चनः । तुल्यप्रियाप्रियो धीरस्तुल्यनिन्दात्मसंस्तुतिः ॥ २४॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

6 पद
समदुःखसुखः
दुःख-सुख में समान
स्वस्थः
अपने में स्थित
समलोष्टाश्मकाञ्चनः
मिट्टी, पत्थर और सोने में समान
तुल्यप्रियाप्रियः
प्रिय और अप्रिय में समान
धीरः
धीर
तुल्यनिन्दात्मसंस्तुतिः
निन्दा और आत्म-स्तुति में समान।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

जो दुःख-सुख में समान है, स्वस्थ (आत्मस्थ) है, मिट्टी, पत्थर और सोने में समान है, प्रिय-अप्रिय में तुल्य है, धीर है, और निन्दा-स्तुति में समान है।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

गुणातीत पुरुष में ये समताएँ होती हैं। The transcendent one possesses equanimity in all dualities.

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

भगवान कहते हैं: जो दुःख-सुख में समान है, अपने आप में स्थित है, मिट्टी, पत्थर और सोने में समान है, प्रिय-अप्रिय में समान, धीर, और निन्दा-स्तुति में समान है। He who is the same in pain and pleasure, self-abiding, to whom a clod, stone, and gold are alike, same in pleasant-unpleasant, firm, and same in censure and praise.

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

यह समत्व ही योग है। यह गुणातीत अवस्था का सूचक है। This equanimity is yoga; it indicates the state beyond gunas.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 14: गुणत्रय विभाग योग (Gunatraya Vibhaga Yoga)
वर्तमान में आप श्लोक संख्या 24 का अध्ययन कर रहे हैं।
श्लोक 24/27 89% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
श्लोक कॉपी कर लिया गया है!