श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 14 (गुणत्रय विभाग योग (Gunatraya Vibhaga Yoga))

अध्याय 14 · श्लोक 3

गुणत्रय विभाग योग (Gunatraya Vibhaga Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 27 3 मिनट का पठन 122 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
मम योनिर्महद्ब्रह्म तस्मिन्गर्भं दधाम्यहम् । सम्भवः सर्वभूतानां ततो भवति भारत ॥ ३॥

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

12 पद
मम
मेरी
योनिः
योनी (कारण)
महद्ब्रह्म
महद्ब्रह्म (मूल प्रकृति)
तस्मिन्
उसमें
गर्भम्
गर्भ
दधामि
धारण करता हूँ
अहम्
मैं
सम्भवः
उत्पत्ति
सर्वभूतानाम्
सब प्राणियों की
ततः
उससे
भवति
होती है
भारत
हे भारत।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

हे भारत! मेरी योनी महद्ब्रह्म (प्रकृति) है, उसमें मैं गर्भ स्थापित करता हूँ, उससे सब प्राणियों की उत्पत्ति होती है।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

यहाँ महद्ब्रह्म प्रकृति है। भगवान उसमें जीवात्मा रूप गर्भ स्थापित करते हैं, फिर सब जीव उत्पन्न होते हैं। The great Brahman is the material cause, and the Lord impregnates it with the individual souls.

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

भगवान कहते हैं कि उनकी योनी (कारण) महद्ब्रह्म (मूल प्रकृति) है। उस प्रकृति में वे जीवात्मा रूप गर्भ स्थापित करते हैं, जिससे सभी प्राणियों की उत्पत्ति होती है। The Lord says that His womb is the great Brahman (primordial nature); He places the seed (souls) in it, and thus all beings are born.

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

भगवान समस्त सृष्टि के पिता हैं और प्रकृति माता। सभी जीव उन्हीं के अंश हैं। The Lord is the father of all creation, and nature is the mother; all souls are parts of Him.

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 14: गुणत्रय विभाग योग (Gunatraya Vibhaga Yoga)
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श्लोक 3/27 11% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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