मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
यदादित्यगतं तेजो जगद्भासयतेऽखिलम् । यच्चन्द्रमसि यच्चाग्नौ तत्तेजो विद्धि मामकम् ॥ १२॥
पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)
15 पदयत्
जो
आदित्यगतम्
सूर्य में स्थित
तेजः
तेज
जगत्
संसार को
भासयते
प्रकाशित करता है
अखिलम्
सम्पूर्ण
यत्
जो
चन्द्रमसि
चन्द्रमा में
यत्
जो
च
और
अग्नौ
अग्नि में
तत्
उस
तेजः
तेज को
विद्धि
जानो
मामकम्
मेरा।
श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)
हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)
जो तेज सूर्य में स्थित है और सम्पूर्ण जगत को प्रकाशित करता है, जो चन्द्रमा में है और जो अग्नि में है – उस तेज को मेरा ही जानो।
दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)
संपादक व शोधकर्ता
श्रीराम शास्त्री
वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।
संपादकीय समीक्षा
आचार्य देवदत्त द्विवेदी
वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।
भगवान कृष्ण कहते हैं कि सूर्य, चन्द्रमा और अग्नि का तेज वास्तव में उन्हीं का है। वे सभी प्रकाश के स्रोतों के मूल हैं। यह उनकी विभूति है।
श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse
भगवान कृष्ण कहते हैं कि सूर्य में स्थित जो तेज है, जो सम्पूर्ण जगत को प्रकाशित करता है, तथा जो तेज चन्द्रमा में है और जो अग्नि में है – उस सब तेज को तुम मेरा ही समझो।
आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message
जगत में जितने भी प्रकाश के स्रोत हैं, वे सब परमात्मा की ही विभूतियाँ हैं। वही सबका मूल स्रोत है। इस प्रकार सृष्टि के सभी तेजस्वी पदार्थों में उसी का अंश देखना चाहिए।